सोमवार, 16 नवंबर 2015

डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा की रचनाएं


चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार


ताँका कविताएँ..


 (एक)

निशा ने कहा
भोर द्वारे सजाए
निराशा नहीं
तारक आशा के हैं
चाँद आये न आए ।


(दो) 

सूरज कहे
ऐसा कर दिखाओ
व्याकुल -मना
वीथियाँ हों व्यथित
कभी तुम ना आओ ।


(तीन) 

कविता मेरी
बस तेरा वन्दन
तप्त पन्थ हों
तप्त पथिक मन
सुखदायी चन्दन |


(चार)

मैं मृण्मयी हूँ
नेह से गूँथ कर
तुमने रचा
अपना या पराया
अब क्या मेरा बचा |


(पांच) 

तुम भी जानो
ईर्ष्या विष की ज्वाला
फिर क्यूँ भला
नफ़रत को पाला
प्यार को न सँभाला |

(छह)

चाहें न चाहें
हम कहें न कहें
नियति -नटी
बस यूँ ही नचाए
रंग सारे दिखाए ।


सेदोका कविताएँ ...


(एक)

उड़ो परिंदे !
पा लो ऊँचे शिखर
छू लो चाँद -सितारे,
अर्ज़ हमारी-
इतना याद रहे
बस मर्याद रहे !

(दो)

जो तुम दोगे
वही मैं लौटाऊँगी
रो दूँगी या गाऊँगी ,
तुम्हीं कहो न
बिन रस ,गागर
कैसे छलकाऊँगी ?

(तीन)

सज़ा दी मुझे
मेरा क्या था गुनाह
फिर मुझसे कहा
अरी कविता
गीत आशा के ही गा
तू भरना न आह !

(चार)

आई जो भोर
बुझा दिए नभ ने
तारों के सारे दिए
संचित स्नेह
लुटाया धरा पर
किरणों से छूकर।

(पांच)

मन -देहरी
आहट सी होती है
देखूँ, कौन बोलें हैं ?
आए हैं भाव
संग लिये कविता
मैंनें द्वार खोले हैं ।

(छह)

अकेली चली
हवा मन उदास
कितनी दुखी हुई
साथी जो बने
चन्दन औ' सुमन
सुगंध सखी हुई ।

(सात)

मन से छुआ
अहसास से जाना
यूँ मैंने पहचाना
मिलोगे कभी
इसी आस जीकर
मुझको मिट जाना ।

(आठ)

बूँद-बूँद को
समेट कर देखा
सागर मिल गया
मैं सींच कर
खिला रही कलियाँ
चमन खिल गया।

(नौ)

जीवन-रथ
विश्वास प्यार संग
चलते दो पहिये
समय -पथ
है सुगम ,दुखों की
बात ही क्या कहिए।

(दस)

मेरे मोहना
उस पार ले चल
चलूँगी सँभलके
दे  ज्ञान दृष्टि
मिटे अज्ञान सारा
ऐसे मुझे मोह ना ।

कुण्डलियाँ 


(एक)

दिन ने खोले नयन जब ,बड़ा विकट था हाल ,
पवन,पुष्प,तरु ,ताल ,भू ,सबके सब बेहाल |
सबके सब बेहाल ,कुपित कुछ लगते ज्यादा ,
ले आँखों अंगार , खड़े थे सूरज दादा |

घोल रहा विष कौन .गरज कर जब वह बोले ,

लज्जित मन हैं मौन , नयन जब दिन ने खोले || 

                                                                                 
(दो)

नन्हीं बूँदें नाचतीं , ले हाथों में हाथ ,                              
पुलकित है कितनी धरा ,मेघ सजन के साथ |
मेघ सजन के साथ ,सरस हैं सभी दिशाएँ ,                              
पवन पत्तियों संग , मगन मन मंगल गाएँ |
अब अँगना के फूल , ठुमक कर नाचें कूदें ,
भिगो गईं मन आज , धरा संग नन्हीं बूँदें || 

जीवन में उत्साह से, सदा रहे भरपूर|
निर्मलता मन में रहे ,रहें कलुष से दूर||


डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 


एच -604 , प्रमुख हिल्स ,छरवाडा रोड
वापी ,जिला - वलसाड
गुजरात (भारत )
पिन - 396191
ईमेल:jyotsna.asharma@yahoo.co.in
sharmajyotsna766@gmail.com



डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा



  • जन्म स्थान : बिजनौर (उ0प्र0)
  • शिक्षा : संस्कृत में स्नातकोत्तर उपाधि एवं पी-एच0डी0शोध विषय : श्री मूलशंकरमाणिक्यलालयाज्ञनिक की संस्कृत नाट्यकृतियों का नाट्यशास्त्रीय अध्ययन |
  • प्रकाशन : ‘यादों के पाखी’(हाइकु-संग्रह), ‘अलसाई चाँदनी’ (सेदोका –संग्रह ) एवं ‘उजास साथ रखना ‘(चोका-संग्रह) में स्थान पाया |
  • विविध राष्ट्रीय,अंतर्राष्ट्रीय (अंतर्जाल पर भी) पत्र-पत्रिकाओं ,ब्लॉग पर  यथा– हिंदी चेतना,गर्भनाल ,अनुभूति ,अविराम साहित्यिकी रचनाकार, सादर इंडिया,उदंती,लेखनी, यादें,अभिनव इमरोज़ ,सहज साहित्य ,त्रिवेणी ,हिंदी हाइकु ,विधान केसरी ,प्रभात केसरी ,नूतन भाषा-सेतु आदि में हाइकु,सेदोका,ताँका ,गीत ,कुंडलियाँ ,बाल कविताएँ ,समीक्षा ,लेख आदि विविध विधाओं में अनवरत प्रकाशन |
  •  संपर्क: H-604 ,प्रमुख हिल्स ,छरवाडा रोड, वापी जिला- वलसाड , गुजरात (भारत).पिन- 396191
  •  ईमेल: Jyotsna.asharma@yahoo.co.in
  • Sharmajyotsna766@gmail.com

10 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 17 नवम्बबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (17-11-2015) को "छठ पर्व की उपासना" (चर्चा-अंक 2163) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  4. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार....

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  5. मेरी अभिव्यक्ति को यहाँ स्थान देने के लिए हृदय से आभार सुबोध जी !प्रेरक प्रतिक्रया से उत्साह बढ़ाने के लिए सभी सुधिजनों के प्रति भी हृदयतल से आभार व्यक्त करती हूँ !

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

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